कह रहा है शोर-ए-दरिया से समंदर का सुकून,
जिसकी जितनी औकाद का वो उतना ही शांत है।
खामोश है फरिश्ते देख कर जलिमो को सड़कों पर,
मुझे मेरी मिट्टी पे, मेरे वतन पर इतने गुमान से तरस आया।
इबादत करते है सुबह शाम अल्लाह की,
फिर भी देश से ख़िलाफत ए सुकून आया।।
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