Wednesday, April 8, 2020

सतयुग के कोरोना भगवान

कोरोना नहीं शायद सतयुग आ    
रहा है

ना इतवार बीतने की चिंता,

 ना सोमवार आने का डर,

      ना पैसे कमाने का मोह

       ना खर्च करणे की ख्वाइश्

    ना होटल मे खाणे की इच्छा

    ना घुमने जाणे की खुशी

   ना सोना-चांदी का मोह

   ना पैसे का मोह

ना नए कपड़े पहनने की एक्साइटमेन्ट
ना अच्छे से तैयार होने की चिंता

क्या हम मोक्ष के द्वार पर पहुंच गए है


लगता है कलयुग समाप्त हो गया और सतयुग आ गया है।

दुर्गा पूजा,व्रत उपवास,हवन,रामायण, महाभारत।

प्रदूषण रहित वातावरण।

भाग -दौड़ भरी जिंदगी समाप्त।

सादगी भरा सबका जीवन - सब दाल-रोटी खा रहे हैं।

समानता आ गयी है, कोई नौकर नहीं,घर में सब मिल जुलकर काम कर लेते हैं।

न कोई महँगे कपड़े पहन रहा है न कोई आभूषण धारण कर रहा है।

सब 24 घण्टे ईश्वर को ही याद कर रहे हैं।

लोग अपार दान धर्म कर रहे हैं।

सबका अहंकार शान्त हो गया है।

लोग परस्पर सहयोग कर रहे हैं।
 
सब बच्चे बाहर से आकर माँ बाप के पास रहने लगे हैं।

घर घर भजन कीर्तन हो रहे हैं।

ये सतयुग नहीं तो और क्या है ?
प्रकृति भी शान्त है 
जीव जन्तु 

Thursday, March 26, 2020

वैसे सब अच्छा किया है, ये भी कर देते तो अच्छा होता।।

वैसे सब अच्छा किया है, 
ये भी कर देते तो अच्छा होता।।

60,000/- महीने की तनख्वाह वाले जैव वैज्ञानिकों से उम्मीद पूरे देश को हैं, 
अगर 7 करोड़ सालाना वाले क्रिकेटर से लेकर इन वैज्ञानिकों के लिए अच्छी प्रयोगशाला बना देते तो अच्छा होता।

हजारों स्पॉन्सर्स मिल जाते होंगे क्रिकेट और सिनेमा को,
अगर दो चार *विज्ञान* को भी मिल जाते तो अच्छा होता।।

33 करोड का चंदा दिया है प्रधान मंत्री राहत कोश में आपने,
अगर कुछ ध्यान आपके अपने  हजारों बेसहारा सैनिकों पर भी दे देते तो अच्छा होता।।

मरने पर 5 लाख का मुआवजा दोगे ऐसा सुना मैंने, 
जो रोज जिंदा ही मर रहे है दो वक़्त की रोटी के बिना,
उनका भी सोच लेते तो अच्छा होता।।

बारिश के साथ मलेरिया डेंगू और चिकनगुनिया भी आने वाले होंगे जल्दी ही,
जरा अस्पतालों कि हालत सुधर जाती तो अच्छा होता।।

जानता हूं बहोत खेद जताया है अपने कोरोना से हुए संकट पर,
पर दो दिन पहले 17 जाबांज जवानों को उनके परिवार के लिए भी दो शब्द बोल देते तो अच्छा होता।।

वैसे सब अच्छा किया है, 
जरा इस पर भी सोच लेते तो अच्छा होता।।

शुभम गुप्ता
सहायक कमांडेंट
31 वाहिनी, 
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल


Monday, March 2, 2020

बदनाम गली

जिस्म का सौदा जहां पर आम हैं,
 हर शहर में एक गली बदनाम है 
द्रौपदी सीता की इज्जत जो बचा ले 
आज ना कोई कृष्ण है ना राम है  
बट रही है कॉम मजहब के हाथों में 
लोग समझते इसमें बड़ा आराम है 
भीड़ में पैरो से जो कुचला गया 
वही आज इस देश में गुमनाम है 
क्या समझ पाएगा कोई इं शुभम शब्दों को,
लिखते हुए ज़हन में अभी भी आग है 

Wednesday, January 15, 2020

कह रहा है शोर-ए-दरिया से समंदर का सुकून।।

कह रहा है शोर-ए-दरिया से समंदर का सुकून,

जिसकी जितनी औकाद का वो उतना ही शांत है।

खामोश है फरिश्ते देख कर जलिमो को सड़कों पर,

मुझे मेरी मिट्टी पे, मेरे वतन पर इतने गुमान से तरस आया।

इबादत करते है सुबह शाम अल्लाह की, 

फिर भी देश से ख़िलाफत ए सुकून आया।।