ऐसा क्यों है कि तुम बिन अर्थ बदल जाते हैं, कहता तो हूं पर शब्द मेरे व्यर्थ जाते हैं, गाता तो हूं पर सुर बिखर जाते हैं, मंजिल तो वही है पर रास्ते बदल जाते हैं, ऐसा क्यों है कि तुम बिन अर्थ बदल जाते हैं।।