Sunday, September 1, 2024

मैं कैसे बदल गया।।

आज टुकड़ा टुकड़ा बिखर गया,
वो खुशदिल इंसान किधर गया,
किधर गई वो बातें उसकी,
वो इतना कैसे बदल गया,

आज हालत उसकी बदली है,
या वो हालातों में जकड़ गया,
वो सबको संभालने वाला,
आज इतना कैसे बिखर गया।।

बदल गया अब कहते हो,
उसने भी कुछ खोया होगा,
इतना भी वो पत्थर नही,
को कर वो भी रोया होगा।।

और नही समझना,
तो मत समझो,
मत समझो उसकी हालत को,
उसके आहत जज्बातों को,

दिन भर चेहरे पर हसी लिए,
वो सोता नही अब रातों को,
वो गिरा, संभला, फिर चला,
वो संघर्षों से निखर गया,

अब असर नहीं होता उसपर,
वो इतना दूर जो निकल गया।

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